कलमकार की कलम से

चिंतन • मंथन • लेखन •

व्यंग्य, मुक्तक, कविता

गीत, ग़ज़ल और शायरी के माध्यम से

यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति

समीक्षाएँ: उत्कृष्ट

★★★★★

कलमकार की कलम से

कमल सिंह मंडेलिया की साहित्यिक यात्रा का सूत्रपात वर्ष 2012 में उनके शासकीय सेवा में पदार्पण के साथ ही हुआ। प्रशासन की व्यस्ततम जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अपनी सृजनात्मकता को जीवंत रखा और निरंतर लेखन के माध्यम से समाज से संवाद किया।

काव्य से गद्य तक का सफर:

उनकी लेखनी ने साहित्य की विभिन्न विधाओं को बहुत ही कुशलता से छुआ है:

प्रारंभिक चरण (पद्य): लेखन के शुरुआती दौर में उन्होंने मुक्तक, कविता, गीत, गजल और शायरियों के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं को शब्दबद्ध किया। उनकी काव्य दृष्टि में तरलता और गहराई दोनों का अनूठा संगम मिलता है।

वर्तमान चरण (गद्य): समय के साथ उनके लेखन ने एक नया विस्तार लिया। उन्होंने गद्य की महत्वपूर्ण विधाओं जैसे लेख, आलेख और संपादकीय लेखन में महारत हासिल की। उनके लेखों में सामाजिक मुद्दों पर गंभीर चिंतन और प्रशासनिक अनुभवों की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।

साहित्यिक दर्शन:

एक व्यंग्यकार और विचारक के रूप में कमल सिंह मंडेलिया का मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यथार्थ को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उनकी रचनाएँ प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनजीवन के बीच एक सेतु का कार्य करती हैं, जो पाठकों को सोचने पर विवश करती हैं।

A thoughtful man sitting at a wooden desk, writing poetry with a vintage fountain pen.
A thoughtful man sitting at a wooden desk, writing poetry with a vintage fountain pen.
लेखन की यात्रा
विचार और चिंतन

व्यंग्य, मुक्तक, गीत और शायरी के माध्यम से सामाजिक और नैतिक मुद्दों पर गहरा मंथन।

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